सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित मुख्य समस्याएं क्या हैं?

software development challenges

Key Challenges faced by software developer:

Software Development या सॉफ्टवेयर विकास प्रक्रिया Information Technology कंपनियों का मुख्य विभाग है जिसमे कई प्रकार के सॉफ्टवेयर को डेवलप किया जाता है। आज मार्केट में IT कंपनियों की भरमार है जिसमे कुछ छोटी और बड़ी कंपनिया भी सामिल है जैसे Google, Microsoft, Tata और Wipro आदि है।

आज लगभग सभी कंपनियों या कारखानों में सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके कारण कम समय में अधिक कार्य होता है और लागत भी काम लगती है। सॉफ्टवेयर विकास के कारण आज मिली सेकंड में Email भेजा जा सकता है। मोबाइल में एंड्रॉयड (Android) सिस्टम आ जाने से लोगो के लिए मोबाइल फोन चलाना भी काफी आसान सा हो गया है बच्चे हो या वृद्ध सभी मोबाइल को काफी आसानी से ऑपरेट कर सकते है। यही सॉफ्टवेयर विकास का फायदा है और लोग इन्ही विषयों पर ज्यादा जोर दे रहे है। यह सब बाते तो सॉफ्टवेयर विकास पर हो गई।

सॉफ्टवेयर विकास प्रक्रिया में इन सभी फेस को पूर्ण किया जाता है।

Planning - Analysis - Design - Implementation - Testing & Integration - Deployment and Maintenance

अब बात करते है सॉफ्टवेयर विकास की समस्याओं के बारे में। सॉफ्टवेयर विकास के दौरान डेवलपर यानी की सॉफ्टवेयर विकास कर्ता को कई समस्याओं और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिनके बारे में हम चर्चा करने वाले है।

Software Development problem or issues

Six Common problem in software development process:

1) Requirements Gathering: इसमें डेवलपर को कस्टमर की सभी requirement को एकत्रित करना पड़ता है इसमें काफी समय लगता है और कभी कभी requirement कलेक्ट करते समय कुछ रिक्वायरमेंट छूट जाते है और कुछ समझ में नही आते जो की आगे चल कर बहुत परेशानी उत्पन्न करता है।

2) Limited Time: किसी भी डेवलपमेंट में डेवलपर को प्रतिबंधित समय दिए जाते है जिसके अंतर्गत उन्हें उस सॉफ्टवेयर या प्रोडक्ट को बनया जाता है। यदि समय के पहले कार्य नही होता तो उनके पगार में कटौती की जाती है।

3) Requirement Changing: सॉफ्टवेयर विकास के दौरान रिक्वायरमेंट बदलते रहते है और development इसी कारण काफी समय लगता है।

4) Security: सॉफ्टवेयर में सिक्योरिटी प्रदान करना कठिन कार्य होता है जिसमे डेवलपर को कई प्रकार की सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी का प्रयोग करना पड़ता है ताकि उसे सुरक्षित रखा जा सके।

5) Software Testing: सॉफ्टवेयर कंप्लीशन (समापन) के बाद सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट को टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है जहा पर सॉफ्टवेयर tester उसे automated या manual तरीके से उस सॉफ्टवेयर को टेस्ट करता है और उसने से खामियां यानी की Error, Bugs और कई अन्य problem को ढूंढता है और उसे वापस से डेवलपमेंट के लिए भेज देता है। उसके बाद डेवलपर को वापस उस सॉफ्टवेयर पर काम करना पड़ता है।

6) Further Maintenance: सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट को कस्टमर को बेचने के बाद यदि आने वाले कुछ दिनों तक उसमे किसी भी प्रकार की दिक्कत या परेशानी ग्राहक को आती है तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी सॉफ्टवेयर डेवलपर की होती है।

इनके अलावा भी कई अन्य चैलेंज का सामना करना पड़ता है

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